*रतन गुप्ता*
भारत-नेपाल सीमा के सोनौली बार्डर से कॉस्मेटिक सामान की तस्करी तेजी से फल-फूल रही है। नेपाल से हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये का कॉस्मेटिक माल चोरी-छिपे गोरखपुर समेत आसपास के जिलों में खपाया जा रहा है।
नेपाली बाजार में सस्ते दामों पर मिलने वाले शैंपू, टूथपेस्ट, क्रीम, साबुन, लिपस्टिक, नेल पेंट, डियो और परफ्यूम जैसे उत्पाद बिना किसी वैध कागजी कार्रवाई के भारतीय बाजार में पहुंचाए जा रहे हैं। इस धंधे में तस्करों से लेकर थोक व्यापारी और फुटकर दुकानदार तक शामिल बताए जा रहे हैं।
नेपाल में मिलने वाले अधिकांश कॉस्मेटिक उत्पाद भारतीय बाजार की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। नेपाली रुपये में खरीदे गए इन सामानों को सीमा पार कर भारत के कई जिलों के बाजारों तक पहुंचा दिया जाता है।
नेपाल और भारत में एक ही उत्पाद के दाम में 50 से 60 रुपये तक का अंतर होता है। इसी अंतर का फायदा उठाकर तस्कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि ग्राहक एमआरपी देखकर यह मान लेते हैं कि वे असली और अधिकृत उत्पाद खरीद रहे हैं।
कई भारतीय कंपनियों की नेपाल में चल रही फैक्टरी
बताया जा रहा है कि कई बड़ी भारतीय कंपनियों की फैक्टरियां नेपाल में संचालित हो रही हैं। एक ही कंपनी भारत और नेपाल दोनों बाजारों के लिए उत्पाद तैयार करती है। नेपाल में बने उत्पादों पर वहां के हिसाब से कीमत तय होती है लेकिन वही सामान अवैध तरीके से भारत लाकर यहां की एमआरपी पर बेचा जाता है।
पैकेजिंग और ब्रांड नाम एक जैसे होने के कारण आम उपभोक्ता के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से इन उत्पादों को खपाना तस्करों के लिए आसान हो जाता है।
छोटी दुकानों में लाखों का स्टॉक
शहर के बड़े बाजारों में कई ब्रांडेड कंपनियों के स्टॉकिस्ट इन सामानों को अपने गोदामों में रखते हैं और थोक ग्राहकों को सप्लाई कर देते हैं। इसके बाद फुटकर दुकानों के जरिये यही माल आम ग्राहकों तक पहुंच जाता है।
सोनौली बार्डर से कार , बस डीसीएम के सहारे सुबह साम समानों को लोड कर गोरखपुर भेजा जाता है । इस समय जम कर कास्मेटिक समानों की तस्करी हो रही तस्करों ने लाईन बाद रखें है जिससे समान पकड़े नहीं जा रहे हैं ।
