बस्ती। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर विश्व संवाद परिषद के राष्ट्रीय महासचिव एवं योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रखर मार्गदर्शक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने जनमानस को परिवर्तन को जीवन का शाश्वत नियम स्वीकार करने का प्रेरक संदेश दिया।
अपने संदेश में प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि परिवर्तन संसार का अटल नियम है। जो व्यक्ति इस नियम को स्वीकार नहीं करता या जिसकी मनःस्थिति परिवर्तन के अनुकूल नहीं होती, उसके जीवन में सुख-शांति की फसल नहीं उग पाती। उन्होंने बीज और वृक्ष के उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जो बीज अपने अस्तित्व को त्यागकर धरती के गर्भ में प्रवेश करता है, वही वृक्ष बनकर संसार को छाया और फल प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियों का गुलाम बन जाना मनुष्य को कभी सुखी नहीं बना सकता। जीवन में परिस्थितियाँ सदैव एक जैसी नहीं रहतीं—रात के बाद दिन, पतझड़ के बाद वसंत और गर्मी के बाद सर्दी का आना प्रकृति का नियम है। इसी प्रकार जीवन में दुःख के बाद सुख अवश्य आता है। न तो सुख स्थायी है और न ही दुःख व चिंताएं सदा के लिए रहती हैं।
मकर संक्रांति जैसे पर्व हमें जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आत्मचिंतन और नव ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने इस अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन अपनाने का आह्वान किया।
