बस्ती। योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हुए पतंजलि योग पीठ, हरिद्वार यूनिट बस्ती के योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह ने बाह्य प्राणायाम की विधि, सावधानियाँ एवं लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाह्य प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ मन, बुद्धि और आत्मा को नियंत्रित करने का प्रभावी साधन है।
डॉ. सिंह ने बताया कि बाह्य प्राणायाम के अभ्यास हेतु सिद्धासन, पद्मासन, स्वस्तिकासन या सामान्य पालथी में बैठकर कमर, गर्दन और सिर को सीधी रेखा में रखना चाहिए। दोनों हाथों को ज्ञान-मुद्रा में रखकर शरीर को स्थिर एवं एकाग्र किया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे नासिका से प्राण को बाहर निकालकर, बाहर ही रोकते हुए जालन्धर बन्ध, उड्डीयान बन्ध एवं मूल बन्ध का प्रयोग किया जाता है। सामर्थ्य पूर्ण होने पर क्रमशः तीनों बन्धों को छोड़ते हुए श्वास को पुनः धीरे-धीरे भीतर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को कम से कम तीन बार करने की सलाह दी गई।
उन्होंने सावधानियों पर विशेष बल देते हुए कहा कि श्वास-प्रश्वास सदैव नथुनों से ही होना चाहिए, मुख से नहीं। प्राण को भीतर लेते समय जल्दबाजी न करें और न ही जबरदस्ती अधिक देर तक रोकने का प्रयास करें। अभ्यास के दौरान ‘ओ३म्’ या वैदिक मंत्रों का जप तथा मन को पूर्ण रूप से संयमित रखना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि निरंतर अभ्यास से बाह्य प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और मानसिक तनाव को कम करता है। साथ ही यह साधक को आत्मा-परमात्मा के चिंतन की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने बताया कि कल आभ्यन्तर प्राणायाम की विधि और उसके लाभों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। योग में रुचि रखने वाले साधकों से उन्होंने नियमित अभ्यास और अनुशासन अपनाने का आह्वान किया।
