भारत नेपाल बार्डर पर दाऊद-ISI की योजना ‘C’ ध्वस्त!1000 पिस्तौल और ISI का ‘ग्रेनेड प्लान’,सोनौली बार्डर था केन्द्र दहलाने वाली पूरी कहानी!

रतन गुप्ता वरिष्ठ संपादक
भारत-नेपाल बॉर्डर पर दाऊद इब्राहिम और ISI की मदद से बन रही थी अवैध हथियारों की सबसे बड़ी फैक्ट्री. सलीम ‘पिस्टल’ और शारिक साठा का नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों ने ध्वस्त किया.

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे काले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसने पूरे एशिया को हिला दिया. दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत-नेपाल बॉर्डर पर बनाई जा रही थी अवैध हथियारों की सबसे बड़ी फैक्ट्री, लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही इसे ध्वस्त कर दिया गया. इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि कुख्यात हथियार तस्कर सलीम उर्फ ‘पिस्टल’ और उसका साथी शारिक साठा था. दोनों भारतीय मूल के, जो पाकिस्तान और दुबई से मिलकर भारत को हथियारों से भर देने की साजिश रच रहे थे.
दाऊद-ISI का योजना ‘C’ ध्वस्त! 15 साल, 1000 पिस्तौल और ISI का ‘ग्रेनेड प्लान’
भारत-नेपाल बॉर्डर पर दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान ISI की मिलीभगत से बन रही थी अवैध हथियार फैक्ट्री.
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क सिर्फ तस्करी नहीं बल्कि भारत में ISI की “गहरी सेंध” की तैयारी थी. सलीम पिस्टल की गिरफ्तारी ने वो राज खोले हैं जो दाऊद इब्राहिम और ISI के ‘प्लान C’ का पूरा ब्लूप्रिंट सामने लाते हैं. एक ऐसा प्लान जो भारत के दुश्मनों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने वाला था.

नेपाल बॉर्डर पर बन रही थी ‘एशिया की सबसे बड़ी अवैध फैक्ट्री’
सलीम पिस्टल और शारिक साठा ने दुबई में रहते हुए पाकिस्तान ISI और दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क के साथ मिलकर भारत-नेपाल सीमा पर अवैध हथियारों की फैक्ट्री लगाने की योजना बनाई थी. इस फैक्ट्री के ज़रिए AK सीरीज़, जैसी पिस्टलों की सप्लाई भारत के कुख्यात गैंग्स तक पहुंचाई जानी थी. सूत्रों के अनुसार यह नेटवर्क “Orient Gun House – Pakistan” से हथियार मंगवाता था जिन्हें वेल्डिंग मशीनों में छिपाकर कराची से बैंकॉक और फिर काठमांडू होते हुए भारत में भेजा जाता था.सोनौली बार्डर था केन्द्र
सलीम पिस्टल का कबूलनामा- दाऊद और ISI का ‘प्लान C’ उजागर
गिरफ्तारी के बाद सलीम पिस्टल ने खुलासा किया कि वह सालों से पाकिस्तान में ISI के संपर्क में था. वहां से उसे दुबई भेजा गया जहां शारिक साठा के साथ मिलकर उसने “भारत में हथियार नेटवर्क फैलाने” का जिम्मा लिया. सलीम ने बताया कि उसने करीब 15 वर्षों में 1000 से ज्यादा पिस्तौलें भारत में सप्लाई कीं. दुबई में वह “SK Enterprise” नाम की फर्जी कंपनी चला रहा था, जिसके जरिए गोल्ड स्मगलिंग और हथियारों की डीलिंग दोनों की जाती थी. उसके पास से तीन भारतीय पासपोर्ट, दो पाकिस्तानी पहचान पत्र और एक दुबई रेसिडेंस कार्ड बरामद हुआ.
शारिक साठा: संभल हिंसा का मास्टरमाइंड और ISI का एजेंट
सलीम का साथी शारिक साठा, संभल (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है. वह 2020 में नकली पासपोर्ट से दुबई भाग गया और वहीं से ISI के लिए काम करने लगा. उस पर 50 से ज़्यादा केस दर्ज हैं और नवंबर 2024 की संभल हिंसा का वह मास्टरमाइंड बताया गया है. साठा दुबई में बैठकर न सिर्फ दंगों की फंडिंग करता था बल्कि अवैध हथियारों की सप्लाई का पूरा नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था. उसकी संपत्तियों में से ₹2.31 करोड़ रुपये की जब्ती पहले ही हो चुकी है.
भारत की एजेंसियों की बड़ी कामयाबी
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरी साजिश को ‘एशिया का सबसे बड़ा अवैध हथियार ऑपरेशन’ बताया है. नेपाल में सलीम की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि वह अपनी बेटी की शादी के बहाने बॉर्डर पर किसी एजेंट से मिलने आया था. इसी दौरान उसे स्पेशल सेल ने धर दबोचा. उसके पास से विदेशी मुद्रा, सैटेलाइट फोन और नकली पहचान पत्र मिले. फिलहाल सलीम तिहाड़ जेल में है और उस पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया है. जांच अब भी जारी है क्योंकि उसके कुछ विदेशी संपर्कों की पहचान बाकी है

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