*रतन गुप्ता सोनौली*
नेपाल से यूरेनियम की पहली खेप अमेरिका सैनिक विमान से भेज दिया गया । नेपाल सरकार को इसके बदले नेपाल को अरबों डालर मिले जिससे नेपाल का बिकाश हो गया ।पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और वित्त मंत्री रामेश्वर खनाल ने इस समझौते से इनकार किया था लेकिन गोपनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि मार्च 2026 में MCC प्रोजेक्ट की ऊर्जा को नए AI डेटा केंद्रों से जोड़ने और डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी गई थी।
नेपाल सरकार क्या हिमालय में स्थित यूरेनियम का बड़ा भंडार अमेरिका को सौंपने जा रही है? जी है सौंपा जा चुका इस बात की अटकल उस वक्त और बढ़ गई है जब अमेरिका विदेश मंत्री नेपाल आये थे खास बात ये है कि उनका ये दौरा सिर्फ और सिर्फ नेपाल का होगा जबकि अभी तक कोई भी अमेरिकी अधिकारी सिर्फ नेपाल का दौरा नहीं करता था। वो नेपाल के साथ बांग्लादेश और श्रीलंका का भी दौरा करता था।
चीन के पास मुस्तांग यूरेनियम भंडार का अधिकार अमेरिका को देगा दे दिया है नेपाल?

दावे के मुताबिक लो मन्थांग, अपर मुस्तांग में 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को “मुस्तांग स्पेशल जोन” घोषित करने की तैयारी चल रही है। ताकि “पैक्स सिलिका” गठबंधन के तहत अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को यूरेनियम प्रोसेसिंग के लिए विशेष अधिकार दिए जा सकें। हालांकि नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और वित्त मंत्री रामेश्वर खनाल ने इस समझौते से इनकार किया था लेकिन कुछ गोपनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि मार्च 2026 में MCC प्रोजेक्ट की ऊर्जा को नए AI डेटा केंद्रों से जोड़ने और डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। वहीं नेपाल में यूरेनियम के अन्य संभावित स्थलों में मकवानपुर और सिंधुली शामिल हैं।
अमेरिका को अपना यूरेनियम भंडार देगा नेपाल यह चर्चा बहुत दिनों से थी
आपको बता दें कि नेपाल और अमेरिका के बीच 2017 में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे जिसे ‘MCC प्रोजेक्ट’ कहा जाता है। इसके तहत अमेरिका ने नेपाल को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अनुदान दिया था। नेपाल में इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी विरोध हुआ था और ये विरोध चीन की शह पर किया गया था। चीन इस प्रोजेक्ट को नेपाल में अपने प्रभुत्व के लिए खतरा मानता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसी MCC प्रोजेक्ट से मुस्तांग में यूरेनियम प्रोसेसिंग के लिए बिजली सप्लाई करने की बात चल रही है। चर्चा है आज नेपाल ने पहली खेप यूरिनीय का नेपाल को सौंप दिया है ।आने वाले समय में नेपाल का विकाश बहुत तेजी से हो गा ।
