पुरुषोत्तम सुवेदी
पश्चिम नवलपरासी, कार्तिक २२ गते। तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहार घर-आँगन के करीब आते ही पश्चिम नवलपरासी के गन्ना किसानों की आँखें खुशी से नहीं, बल्कि चिंता और आंसुओं से नम हैं। दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर उगाया गया गन्ना चीनी मिलों को सौंपे वर्षों बीत जाने के बाद भी भुगतान न मिलने के कारण यहाँ के किसान परिवार इस साल के त्योहारों में खाली हाथ बैठने को मजबूर हैं। त्योहारों के समय नए कपड़े, घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज की बात तो दूर, साहूकारों का कर्ज और बैंक का ब्याज कैसे चुकाएं, इस बात की चिंता ने किसानों को घेर रखा है। हमेशा की तरह इस साल भी पर्व की खुशी नहीं, बल्कि गन्ना किसानों के घरों में आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का पहरा है। पश्चिम नवलपरासी के प्रतापपुर गांवपालिका के अध्यक्ष एवं गन्ना उत्पादक महासंघ के केंद्रीय प्रवक्ता उमेशचंद्र यादव ने बताया कि चीनी उद्योगों ने लंबे समय से किसानों का बकाया भुगतान न करके उन्हें गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है। उनके अनुसार, इंदिरा शुगर मिल और सुनवल स्थित लुम्बिनी चीनी उद्योग दोनों ने किसानों का बकाया समय पर न देकर उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। उद्योगपतियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण किसानों को त्योहारों के मुहाने पर और अधिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, ऐसा प्रवक्ता यादव का कहना है। पश्चिम नवलपरासी के प्रतापपुर स्थित इंदिरा शुगर मिल ने पिछले वर्षों से किसानों का लगभग सात करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। यह मिल पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद है और इसके संचालक राकेश अग्रवाल किसानों का पैसा दिए बिना ही संपर्क से बाहर हैं। कानूनी कार्रवाई के संबंध में इलाका पुलिस कार्यालय बेलाटारी के पुलिस निरीक्षक रेशमलाल पौडेल के अनुसार, संचालक अग्रवाल के खिलाफ इलाका पुलिस कार्यालय बेलाटारी में ही धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई है। मिल संचालक फिलहाल भारत में रह रहे हैं और संपर्क में नहीं आ रहे हैं, इसलिए पुलिस तय सीमा के भीतर जांच पूरी करके मामले की फाइल जिला अदालत भेजने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर, पश्चिम नवलपरासी के सुनवल स्थित लुम्बिनी चीनी उद्योग का किसानों को दिया जाने वाला बकाया काफी हद तक घटता हुआ दिखाई दे रहा है। उद्योग का कहना है कि आर्थिक वर्ष २०७९/८० का लगभग ७५ लाख और पिछले वर्ष का लगभग १० से १२ लाख रुपये मिलाकर कुल ८५ से ८७ लाख रुपये ही किसानों को देना बाकी है। उद्योग के कार्यकारी अधिकृत केशवराज आचार्य के अनुसार, इस वर्ष मिल का संचालन शुरू होने से पहले ही इस बाकी बकाया राशि का भुगतान कर देने की तैयारी मिल कर रही है। मिट्टी में पसीना बहाकर उगाई गई ‘नकदी फसल’ (Cash Crop) अब पश्चिम नवलपरासी के किसानों के लिए ‘उधार और दुखद फसल’ बन गई है। जिला प्रशासन के दरवाजे से लेकर काठमांडू के माइतीघर मंडला तक की ठंडी जमीन पर बैठकर आंदोलन करने के बाद भी सरकार द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर किसानों ने दुख जताया है। भगोड़े तथा गैर-जिम्मेदार चीनी मिल संचालकों की संपत्ति नीलाम करके भी त्योहारों के इस समय में पसीने की सही कीमत दिलाने की किसानों ने सरकार से जोरदार मांग की है। नवलपरासी (बर्दघाट सुस्ता पश्चिम) में छोटे-बड़े मिलाकर मुख्य रूप से चार चीनी उद्योग मौजूद हैं। इनमें से मोहिनी शुगर मिल और इंदिरा शुगर मिल लंबे समय से पूरी तरह बंद हैं। फिलहाल बागमती चीनी उद्योग और लुम्बिनी चीनी उद्योग ही आंशिक तथा मौसमी रूप से संचालित होते हैं। किसी समय सालाना ३० से ४५ लाख क्विंटल तक गन्ना उत्पादन करने वाले पश्चिम नवलपरासी में भुगतान के झंझट, उद्योगपतियों की ठगी और लागत न निकलने की समस्या के कारण किसान अब केला, सब्जी तथा अन्य वैकल्पिक खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, वर्तमान में जिले में सालाना केवल १५ से १८ लाख क्विंटल गन्ने का ही उत्पादन हो रहा है। उत्पादन में भारी गिरावट आने के बाद अब चालू उद्योगों को भी आवश्यकता अनुसार गन्ना न मिलने का अभाव सताने लगा है।
