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नेपाल से पढ़ाई के बहाने भारत ले जाए जा रहे २५ बच्चों का एसएसबी जवानों ने रोका भारत नेपाल सीमा से रेस्क्यू, नेपाल के परिजनों को सौंपे गए बच्चे

*रतन गुप्ता उप संपादक*
भारत नेपाल बार्डर से पढ़ाई के बहाने भारत ले जाए जा रहे 25 बच्चों का गड्डाचौकी सीमा से रेस्क्यू, परिजनों को सौंपे गए

नेपाली बच्चों को पढ़ाई का झांसा देकर भारत ले जाए जा रहे 25 नेपाली बच्चों को गड्डाचौकी सीमा पर रोक लिया गया था। मंगलवार को इन सभी बच्चों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया और सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया है।
पिछले सप्ताह,नेपाल के हुमला जिले के सिमिकोट गाउँपालिका-८ के २२, खार्पुनाथ गाउँपालिका-२ के २ और अछाम जिले (हाल सिमिकोट निवासी) के १ बच्चे सहित कुल 25 बच्चों को भारत ले जाते समय बार्डर पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) ने रोक लिया था। एसएसबी द्वारा रोके जाने के बाद इन सभी बच्चों को गड्डाचौकी स्थित ‘शांति पुनर्स्थापना गृह’ में रखा गया था।
इन बच्चों को भारत के उत्तराखंड स्थित देहरादून के शाक्य सेंटर में कंप्यूटर और चीनी भाषा सिखाने का प्रलोभन देकर ले जाया जा रहा था। अपने बेटे को लेने गड्डाचौकी पहुंचे हुमला के मेयरसिंह बुढ़ा ने बताया, “हमें कहा गया था कि वहां भाषा और कंप्यूटर सिखाया जाएगा, जिससे भविष्य में तिब्बत में अच्छी नौकरी मिल सकती है। इसीलिए हमने बेटे को भेजा था। लेकिन अब मैं उसे घर ले जाकर सरकारी स्कूल में ही पढ़ाऊंगा। चाहे मुझे मजदूरी ही क्यों न करनी पड़े, अब मैं उसे कहीं नहीं भेजूंगा।” एक अन्य अभिभावक जयकर्ण बुढ़ा ने भी कहा कि गांव में रोजगार और अच्छी शिक्षा न होने के कारण उन्होंने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें भेजा था, लेकिन अब वे उन्हें गांव में ही पढ़ाएंगे।
बच्चों के गड्डाचौकी में रहने और खाने-पीने की व्यवस्था शांति पुनर्स्थापना गृह ने की। वहीं, बच्चों की वापसी यात्रा, रास्ते के भोजन और गर्म कपड़ों का खर्च ‘सामुदायिक विकास केंद्र’ (डोटी) ने वहन किया है। संस्था के प्रतिनिधि तिलक चौधरी ने बताया कि गर्म कपड़ों के लिए १५,४०० रुपये तथा यातायात और रास्ते के भोजन के लिए १,९५,००० रुपये अभिभावकों को सौंपे गए हैं। संस्था हुमला में भी बाल कल्याण के क्षेत्र में काम कर रही है, इसलिए भविष्य में इन बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा में भी आवश्यक मदद की जाएगी।
*मानव तस्करी का मामला दर्ज* शांति पुनर्स्थापना गृह के क्षेत्रीय समन्वयक संजीत सिंह के अनुसार, बच्चों के बयान दर्ज करने के बाद ही उन्हें घर भेजा गया है। इस मामले में बच्चों को भारत ले जाने वाले मुख्य आरोपी सहित ४ लोगों के खिलाफ मानव तस्करी (Human Trafficking) का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में बाजुरा के कुरुगा छोसांग लामा तथा हुमला के पंचवीर बुढ़ा, नंदवीर बुढ़ा और चेतन रावत शामिल हैं। कंचनपुर के प्रमुख जिला अधिकारी मदन कोइराला ने बताया कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की सघन जांच की जा रही है।
नेपाल की सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना ने नेपाल की सीमा सुरक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महेंद्रनगर से गड्डाचौकी तक जगह-जगह नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी और महिला-बाल विकास के क्षेत्र में काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं के चेकपोस्ट और बूथ स्थापित हैं। इसके बावजूद, एक साथ २५ बच्चे नेपाल की सीमा पार कर भारतीय एसएसबी के चेकपोस्ट तक कैसे पहुंच गए, यह एक बड़ी सुरक्षा चूक मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस घोर लापरवाही पर सख्त कदम उठाने चाहिए

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