👉🏻 जानें उनका जीवन और राजनीतिक सफर
सिद्धार्थनगर। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के पश्चिम नवलपरासी निर्वाचन क्षेत्र संख्या-1 के प्रतिनिधि सभा सदस्य चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के उम्मीदवार विक्रम खनाल विजयी हुए हैं। खनाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता और उद्योगपति विनोद कुमार चौधरी को 35,739 मतों के भारी अंतर से पराजित किया है।
कुल 82,107 मतों में से विजयी खनाल ने 45,241 मत प्राप्त किए, जबकि पराजित चौधरी को मात्र 9,502 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
बताते चलें कि लंबे समय तक नेपाली कांग्रेस में सक्रिय रहे खनाल इस क्षेत्र के एक परिचित और अनुभवी राजनेता हैं। उन्होंने नेपाली कांग्रेस में लुम्बिनी प्रदेश के महामन्त्री तक की जिम्मेदारी संभाली थी और हाल ही में वे पार्टी से अलग हुए थे। वर्ष 2040 (विक्रम संवत) में नेविसंघ (नेपाल छात्र संघ) की राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाले खनाल इससे पहले संविधान सभा के सदस्य भी रह चुके हैं। अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर रास्वपा से उम्मीदवार बने खनाल ने प्रभावशाली उद्योगपति चौधरी को हराकर संसद तक का सफर तय किया है।

अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए खनाल ने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि नवलपरासी की जनता की बदलाव के प्रति उच्च आकांक्षा की जीत है। उन्होंने कहा, “जनता पुरानी शक्तियों और पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर सुशासन और विकास की अपेक्षा कर रही है, और मैं उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”
वर्ष 2027 में नवलपरासी के बर्दघाट नगरपालिका-10 में जन्मे खनाल स्नातकोत्तर तक शिक्षित हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय खनाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत वर्ष 2040 में दाउन्नेदेवी मावि, बर्दघाट की नेविसंघ इकाई समिति से की थी। नेपाली कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने महाधिवेशन प्रतिनिधि, महासमिति सदस्य और लुम्बिनी प्रदेश समिति के महामन्त्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
राष्ट्रीय राजनीति में खलबली
उद्योगपति और ‘हेवीवेट’ माने जाने वाले विनोद चौधरी के खिलाफ खनाल की यह बड़ी जीत राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि नवलपरासी के मतदाताओं ने इस बार अनुभवी नेताओं के बजाय नए राजनीतिक विकल्प और मुद्दों को प्राथमिकता दी है।
इस चुनाव परिणाम को स्थानीय स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी एक ‘बड़े उलटफेर’ के रूप में देखा जा रहा है। देश के एकमात्र अरबपति उद्योगपति चौधरी को इतने बड़े अंतर से हराना स्थापित राजनीतिक दलों के लिए एक गंभीर चुनौती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह परिणाम मतदाताओं में पुराने नेतृत्व और कार्यशैली के प्रति असंतोष तथा वैकल्पिक शक्तियों के उदय का स्पष्ट संकेत है।
पूँजी और पहुँच के मामले में बेहद मजबूत माने जाने वाले विनोद चौधरी को खनाल द्वारा 35 हजार से अधिक वोटों से हराना नवलपरासी की चुनावी राजनीति में एक ‘नए युग की शुरुआत’ माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि खनाल की संगठनात्मक पकड़ और रास्वपा के प्रति बढ़ी जनलहर के कारण ही यह परिणाम संभव हुआ है। इस क्षेत्र के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि नई पीढ़ी और नई पार्टी का प्रभाव अब पारंपरिक राजनीतिक शक्तियों को कड़ी चुनौती दे रहा है।
