बस्ती। भारतीय संस्कृति में चैत्र शुक्ला प्रतिपदा का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है, जिसे नव संवत्सर के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग नए संकल्प लेकर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प करते हैं।
विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नववर्ष की शुरुआत होती है। यह दिन प्रकृति में नवजीवन के आगमन का भी प्रतीक है। इस समय वृक्षों में नई पत्तियाँ और पुष्प खिलने लगते हैं, जिससे वातावरण में उत्साह और उमंग का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ला प्रतिपदा केवल नववर्ष का प्रारंभ ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को स्मरण करने का भी अवसर है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अपने पूर्वजों को स्मरण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि यह पर्व समाज में सकारात्मकता, नवीनता और आशा का संदेश देता है। लोग नए वस्त्र धारण कर अपने परिवार और प्रियजनों के साथ मिलकर नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं तथा जीवन में नए लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि नव संवत्सर के इस पावन अवसर पर हमें स्वस्थ जीवनशैली, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाकर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
