
*रतन गुप्ता सोनौली बार्डर*
मानव तस्करी को रोकने के लिए बेहतर सीमा प्रबंधन और नियमन को तय करने की ज़रूरत है.
पिछले एक दशक से मानव तस्करी में संगठित अपराध का सबसे तेज़ी से बढ़ता रूप बनता जा रहा है. कई कारणों जैसे कि बेरोज़गारी एवं ग़रीबी, राजनीतिक अस्थिरता और अपराध की मौजूदगी ने “ज़बरन, धोखे या छल के ज़रिए लोगों की भर्ती, परिवहन, ट्रांसफर, शरण देने या प्राप्ति” को बढ़ा दिया है. इस तरह के कारण जो कि अतिसंवेदनशील लोगों के संबंध को बनाते हैं वो आकर्षित करने वाले कारणों- जैसे कि पैसे से संपन्न बाज़ार जहां कम मज़दूरी लेने वाले श्रमिकों की मांग काफ़ी होने के साथ-साथ महिलाओं एवं बच्चों का यौन शोषण भी काफ़ी होता है- के साथ क़रीब से जुड़े हुए हैं. इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय सीमा के ख़राब प्रबंधन को अक्सर सीमा के पार मानव तस्करी के प्रमुख कारण के रूप में बताया जाता है जिसका नतीजा संगठित अपराध, ज़्यादा भ्रष्टाचार और एचआईवी/एड्स जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलाव के रूप में भी सामने आता है. वास्तव में हाल के वर्षों में सीमा प्रबंधन तेज़ी से छानबीन के दायरे में रहा है. इसकी वजह कम फंडिंग और बुनियादी ढांचे के कारण नियंत्रण करने वाले एजेंसियों और बॉर्डर पुलिस की कम तकनीकी क्षमता है. ऐसे में इस पर नियमित रूप से ध्यान नहीं जाता है और तस्करी के पीड़ित गुमनाम बने रहते हैं ख़ास तौर से अनियमित या असंगठित क्षेत्रों में. अपराधियों के नेटवर्क अभी भी आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि असामाजिक गुट ज़्यादा ख़तरनाक एंट्री प्वाइंट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसकी वजह से जिन लोगों की तस्करी होती है उन्हें ज़्यादा हिंसा, दुर्व्यवहार और बीमारियों के जोखिम का भी सामना करना पड़ता है.
भारत नेपाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली बार्डर के ख़राब प्रबंधन को अक्सर सीमा के पार मानव तस्करी के प्रमुख कारण के रूप में बताया जाता है जिसका नतीजा संगठित अपराध, ज़्यादा भ्रष्टाचार और एचआईवी/एड्स जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलाव के रूप में भी सामने आता है.
मानव सुरक्षा, सामाजिक न्याय, अपर्याप्त शासन व्यवस्था और कमज़ोर आपराधिक न्याय वाले संस्थानों के बारे में चुनौतियों को लेकर कम लचीला रहा है. बड़ी संख्या में लोगों, जिनमें महिलाएं एवं बच्चे शामिल हैं और जिनका शोषण किया गया है, के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण “स्रोत, रास्ता और गंतव्य” घोषित किया गया है. नेपाल- के द्वारा एक आर्थिक और संपर्क रूप-रेखा के ज़रिए इस तरह के सामाजिक मुद्दों के समाधान की कोशिश की जा रही है. इस विशेष समूह को समझना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की पहचान श्रम और यौन तस्करी के लिए एक रास्ते के रूप में की गई है. वास्तव में नेपाल शामिल हैं जहां से मानव तस्करी की जाती है.
भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा ने मानव तस्करी की स्थिति को काफ़ी बिगाड़ दिया है. नेपाली नागरिक मानव तस्करी के शिकार बन जाते हैं. मानव तस्करी करके लाए गए लोगों को या तो अफ्रीका पहुंचाया जाता है या खाड़ी क्षेत्र. ऐसे में उन्हें ट्रेन या बस के ज़रिए भारत ले जाना एक आसान रास्ता माना जाता है. स्थानीय सीमा जहां से उन्हें नेपाल से भारत ले जाया जाता है, वो उत्तर प्रदेश ज़िले के महाराजगंज ज़िले का सोनौली बॉर्डर और रास्तों के ज़रिए उन्हें पहले दिल्ली ले जाया जाता है.
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा ने मानव तस्करी की स्थिति को काफ़ी बिगाड़ दिया है. मानव तस्करी करके लाए गए लोगों को या तो अफ्रीका पहुंचाया जाता है या खाड़ी क्षेत्र. ऐसे में उन्हें ट्रेन या बस के ज़रिए भारत ले जाना एक आसान रास्ता माना जाता है.
