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नेपाल के बुटवल-पाल्पा सुरंग पर परिवहन संचालन की तैयारी

 

*रतन गुप्ता सोनौली*

नेपाल के सिद्धार्थ राजमार्ग के बुटवल-पाल्पा सड़क खंड पर निर्माणाधीन सुरंग को एक महिने से चालू करने के उद्देश्य से निर्माण कार्य में तेज़ी लाई गई है।

परियोजना ने बताया है कि उसने सुरंग के भीतर की संरचनाओं, पहुंच सड़कों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के निर्माण को एक साथ आगे बढ़ाया है। परियोजना के अनुसार, सुरंग का भौतिक कार्य 68 प्रतिशत और वित्तीय कार्य 58 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। पांच साल की निर्माण अवधि वाली यह परियोजना ‘इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन’ (EPC) मॉडल के तहत बनाई जा रही है। इस ‘मॉडल’ के तहत, यह व्यवस्था की गई है कि ‘डिजाइन’, अनुमोदन और निर्माण की पूरी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होगी।

परियोजना प्रमुख राजेश पौडेल ने बताया कि आगामी आसोज तक सुरंग के माध्यम से यातायात संचालित करने के लक्ष्य के अनुसार काम में तेज़ी लाई गई है। उनके अनुसार, निर्माण पूरा होने के बाद पांच वर्षों तक संचालन, रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण कंपनी की होगी। इसके अतिरिक्त पांच वर्षों को ‘लेटेंट डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड’ (DLP) के रूप में रखने की व्यवस्था की गई है।

परियोजना के शुरुआती चरण में कानूनी और तकनीकी जटिलताओं के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था। परियोजना ने बताया कि चूंकि EPC मॉडल नेपाल में एक नई प्रक्रिया है, इसलिए आवश्यक दस्तावेज़ प्रबंधन, पेड़ काटने की अनुमति और बजट प्रबंधन में देखी गई समस्याओं के कारण कुछ देरी हुई है। पौडेल ने कहा कि इन समस्याओं को वर्तमान में हल किया जा रहा है और समय सीमा विस्तार तथा ‘मील का पत्थर’ (milestone) समायोजन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।

सुरंग के साथ बनाई जा रही पहुंच सड़क पर ‘रिजिड पेवमेंट’ (कंक्रीट सड़क) बनाने की अनुमति मिल गई है। परियोजना ने बताया कि सुरंग के भीतर से यातायात शुरू होने के बाद, बाहर के जोखिम भरे क्षेत्रों में ‘रॉकशेड’ और चट्टान सुरक्षा कार्य करने की योजना है। ‘रॉकशेड’ के भीतर पैदल चलने वालों के लिए एक सुरक्षित मार्ग बनाया जाएगा और बाहरी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत का अनुमान लगभग 10 अरब रुपये था, लेकिन एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के ज़रिए लगभग 7 अरब रुपये पर सहमति बनी। प्रोजेक्ट में बताया गया है कि सुरंग बनाने का मुख्य मकसद सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना और जान-माल के नुकसान को कम करना है, क्योंकि सिद्धार्थ हाईवे का यह हिस्सा भूस्खलन और कटाव के लिहाज़ से संवेदनशील माना जाता है।

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