
*रतन गुप्ता सोनौली*
6 विषयों पर होगा मंथन, डिजिटल शिक्षा से लेकर बौद्ध दर्शन, सतत विकास और मूल्य आधारित नागरिकता तक पर होगी अकादमिक चर्चा
लुंबिनी नेपाल /शिक्षा, साहित्य, समाज और संस्कृति के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श को केंद्र में रखकर आयोजित लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय (LBU) अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार-2026 में भारत और नेपाल के 35 से अधिक विद्वान, शोधार्थी एवं शिक्षाविद अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। सेमिनार को छह प्रमुख विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें बौद्ध दर्शन, डिजिटल युग की शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण, सतत विकास तथा मूल्य आधारित शिक्षा जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा होगी। लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक एवं बौद्ध अध्ययन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सम्मेलनों का आयोजन करता रहा है।
सेमिनार के प्रथम विषय “बौद्ध दर्शन एवं पूर्वी ज्ञान परंपराएं” में तनाव प्रबंधन, बौद्ध न्यायशास्त्र, नेतृत्व में नैतिक निर्णय, सामाजिक उत्तरदायी निवेश तथा सतत विकास लक्ष्यों में बौद्ध दृष्टिकोण जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
“डिजिटल युग में उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना” विषय के अंतर्गत शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अनुभवात्मक शिक्षा, जीवन कौशल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के समावेश पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
वहीं “साहित्य : सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का उत्प्रेरक” विषय में शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर मंथन होगा। शोधार्थी साहित्य की भूमिका को सामाजिक विकास, वैश्विक विमर्श और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगे।
सेमिनार का चौथा विषय “इकोफेमिनिज्म, क्लाइमेट फिक्शन एवं पर्यावरणीय मानविकी” है, जिसमें हिमालयी क्षेत्रों की पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान प्रणालियों और जलवायु संकट से जुड़े विमर्श को प्रमुखता दी जाएगी।
“समाज, संस्कृति और सतत विकास” विषय के अंतर्गत भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, शिक्षा और मानव सभ्यता के विकास में सांस्कृतिक मूल्यों की भूमिका पर शोध प्रस्तुत होंगे। वहीं “मूल्य आधारित शिक्षा एवं नैतिक नागरिकता” विषय में युवा पीढ़ी में मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता, नैतिकता और समावेशी नागरिकता को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा होगी।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह सेमिनार केवल अकादमिक विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास के क्षेत्र में नई सोच और नीति निर्माण के लिए भी उपयोगी साबित होगा। बौद्ध शिक्षा, नैतिक मूल्यों और समकालीन चुनौतियों पर केंद्रित ऐसे आयोजन लुंबिनी को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध एवं शैक्षणिक संवाद के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
सेमिनार में विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले प्रमुख विद्वानों में डॉ. दीपक आचार्य, डॉ. मलय कुमार भोज, डॉ. धीरज कुमार पांडेय, डॉ. प्रफुल्ल चंद, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. तरुण कुमार शर्मा, डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, डॉ. देवाकर सिंह, डॉ. वेद प्रकाश वेदी, डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रो. सूरज प्रकाश गुप्ता, प्रो. अभय कुमार लाल, प्रो. सुनील कुमार, माया कुमारी, प्रिया शर्मा, निकिता मणि त्रिपाठी, संग्राम सिंह, रचना, अनन्या शुक्ला, शशिकला चौहान, गिरीश कुमार, तेज बहादुर, रश्मि, जसमीत कौर, मनीष कुमार, कमल थापा, गजेंद्र गुप्ता, कबीर शाक्य, नेशन श्रेष्ठ, दया राम भंडारी, लीलामणि पांडेय, युवराज रायमाझी, देवेंद्र कुमार पाठक, निगाम मौर्य सहित अनेक शोधार्थी एवं शिक्षाविद शामिल
