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सुस्ता विवाद को लेकर समस्या समाधान के लिए पहल शुरू – प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय को लिखित रूप में दी जाएगी जानकारी

पुरुषोत्तम सुवेदी

पश्चिम नवलपरासी। एक सप्ताह पहले भारतीय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की टोली के हथियारों के साथ पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता स्थित नेपाली भूमि में प्रवेश करने के विषय को लेकर समस्या के समाधान के लिए पहल शुरू कर दी गई है।

सुस्ता क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले संघीय सांसद विक्रम खनाल ने सुस्ता पहुंचकर स्थानीय निवासियों के साथ प्रत्यक्ष चर्चा की और घटना की वस्तुस्थिति तथा वास्तविकता को समझने के बाद इस समस्या के समाधान की पहल शुरू की है। सांसद खनाल ने सुस्ता की वास्तविक और हाल ही में उत्पन्न हुई समस्या के बारे में प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्रालय को लिखित रूप में जानकारी देकर समाधान के लिए पहल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कूटनीतिक माध्यम से समाधान का प्रयास
एक सप्ताह पहले भारतीय सुरक्षाकर्मियों (एसएसबी) की टोली के सुस्ता की नेपाली भूमि में प्रवेश करने पर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हो गया था। विवाद के समाधान के लिए पहले चरण में स्थानीय प्रशासन, सुस्ता निवासियों और संघीय सांसद के बीच सोमवार को एक सर्वपक्षीय बैठक (छलफल) होने जा रही है। बैठक के बाद संघीय सांसद खनाल का काठमांडू पहुंचकर प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय को समस्या के समाधान के लिए लिखित जानकारी सौंपने और कूटनीतिक माध्यम से इस समस्या को हल करने के लिए पहल करने का कार्यक्रम है।

स्थानीय निवासियों की चिंता
‘सुस्ता बचाओ अभियान’ के प्रवक्ता रवींद्र जयसवाल के अनुसार, भारतीय सुरक्षाकर्मी जानबूझकर अलग-अलग नए स्थानों से नेपाली भूमि में प्रवेश करते हैं और बाद में दावा करते हैं कि “हम पहले से ही इसी रास्ते से गश्त (पेट्रोलिंग) करते थे।” स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतीय पक्ष की इस प्रवृत्ति के कारण सीमा क्षेत्र में बार-बार विवाद बढ़ता जा रहा है।

सांसद खनाल का बयान:

सांसद खनाल ने कहा कि दोनों देशों के सुरक्षाकर्मियों द्वारा की जाने वाली ‘संयुक्त गश्त’ (जॉइंट पेट्रोलिंग) के अलावा किसी भी अन्य बहाने से भारतीय एसएसबी को नेपाली भूमि में प्रवेश नहीं करना चाहिए और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। सुस्ता के निवासियों ने आरोप लगाया है कि भारतीय एसएसबी गलत नीयत रखकर बार-बार नेपाली भूमि पर अतिक्रमण करने का प्रयास करती है। उन्होंने सरकार से इस विषय का दीर्घकालीन और स्थायी समाधान खोजने की पुरजोर मांग की है।

 

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